इराक़ी सेना की अंबार प्रांत की कमान ने जल्द ही इस प्रांत के पश्चिमी क्षेत्रों से आतंकवादियों का सफ़ाया होने की सूचना दी है। समाचार एजेंसी अलमुस्तक़बल ने मंगलवार को अलअंबार अभियान के कमान्डर रशीद फ़लीह के हवाले से बताया कि फ़ल्लूजा के उपनगरीय और अंबार के पश्चिमी क्षेत्रों में झड़प ने दाइश को कमज़ोर कर दिया है और इन क्षेत्रों पर जल्द ही इराक़ी सेना का नियंत्रण हो जाएगा।
फ़लीह ने कहा कि दाइश के ठिकाने ध्वस्त हो गए हैं और इस आतंकवादी गुट की गतिविधियां नियंत्रण में है और सेना फ़ल्लूजा शहर के उपनगरीय इलाक़ों से आतंकवादियों का सफ़ाया कर रही है और जल्द ही इस शहर और अंबार प्रांत के पश्चिमी क्षेत्रों से आतंकवादियों के सफ़ाए के लिए अभियान शुरु होगा और ये क्षेत्र दाइश के चंगुल से स्वतंत्र हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सेना ने क़बायलियों की सहायता से आतंकवादियों को भारी नुक़सान पहुंचाया, सैकड़ों को मार गिराया और गिरफ़्तार किया और अंबार प्रांत में दाइश की फ़ाइल जल्द की बंद हो जाएगी।
अलअंबार अभियान के कमान्डर रशीद फ़लीह ने कहा कि सेना ने फ़ल्लूजा शहर के पूर्वी क्षेत्र अलहसूह को आज़ाद करा लिया है और फ़ल्लूजा के पश्चिमी व दक्षिणी क्षेत्रों की ओर आगे बढ़ रही है। इसी प्रकार सेना अंबार प्रांत के पश्चिमी क्षेत्रों की ओर भी आगे बढ़ती जा रही है।
ज्ञात रहे तकफ़ीरी आतंकवादी गुट आईएसआईएल या दाइश इराक़ के अंबार, नैनवा, सलाहुद्दीन, दियाला और बाबिल प्रांतों में अभी भी सक्रिय है।
दूसरी ओर इराक़ी महिलाएं भी आतंकवादियों से संघर्ष के लिए सेना में शामिल हो रही हैं।
इराक़ी समाचार एजेंसी ऐन के अनुसार बाबिल प्रांत में महिलाएं आतंकवादियों से संघर्ष में इराक़ी सेना की सहायता के उद्देश्य से हल्के हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रही हैं।
बाबिल प्रांत में महिलाओं को प्रशिक्षण देने वाले फ़ाज़िल करीम के हवाले से समाचार एजेंसी ऐन ने रिपोर्ट में बताया कि आतंकवादियों से संघर्ष के लिए स्वयंसेवी महिलाएं, बाबिल प्रांत सहित इराक़ी राष्ट्र की रक्षा के लिए हल्के हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रही हैं।
बाबिल में ट्रेनिंग ले रही एक महिला स्वयंसेवी ने समाचार एजेंसी ऐन से साक्षात्कार में कहा, “ हम अपनी, अपने बच्चों और बड़ों की रक्षा के लिए स्वेच्छा से सेना से जुड़े हैं ताकि आतंकवादियों के हमलों को निष्क्रिय करे।”
ज्ञात रहे कि इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरु की ओर से तकफ़ीरी आतंकवादियों के ख़िलाफ़ जेहाद के फ़त्वे के बाद लाखों इराक़ी विशेष तौर पर युवाओं ने सेना में शामिल होने के लिए अपना नाम लिखवाया है कि जिन्हें ट्रेनिंग देकर अशांत प्रांत भेजा जा रहा है।